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November 27, 2011 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जानिए केसे हो जन्मकुंडली से रोग निदान ..???

जानिए केसे हो जन्मकुंडली से रोग निदान ..???

आयुर्वेद एवम ज्योतिश्शाश्त्र के अनुसार हमारे पूर्वार्जित पाप कर्मों के फल ही समय समय पर विभिन्न रोगों के रूप में हमारे शरीर में प्रगट होतें हैं । हरित सहिंता का यह श्लोक देखिये - 
जन्मान्तरकृतंपापंव्याधिरुपेणबाधते |
तच्छान्तिरौषधैर्दानर्जपहोमसुरार्चनै : ||

अर्थात पूर्व जन्म में किया गया पाप कर्म ही व्याधि के रूप में हमारे शरीर में उत्पन्न हो कर कष्टकारक होता है तथा औषध, दान ,जप ,होम व देवपूजा से रोग की शान्ति होती है |आयुर्वेद में कर्मदोष को ही रोग की उत्पत्ति का कारण माना गया है | 
कर्म के तीन भेद कहे गए हैं ; 
१ सन्चित

२प्रारब्ध

३क्रियमाण
आयुर्वेद के अनुसार संचित कर्म ही कर्म जन्य रोगों के कारण हैं जिनके एक भाग को प्रारब्ध के रूप में हम भोग रहे हैं । वर्तमान समय मेंकिए जाने वाला कर्मही क्रियमाण है ।वर्तमान काल में मिथ्या आहार -विहार के कारण भी शरीर में रोग उत्पन्न हो जाता है । आचार्य सुश्रुत ,आचार्य चरक व त्रिष्ठाचार्य के मतानुसार कुष्ठ , उदररोग ,,गुदरोग, उन्माद , अपस्मार ,पंगुता ,भगन्दर , प्रमेह ,अन्धता ,अर्श, पक्षाघात ,देह्क्म्प ,अश्मरी ,संग्रहणी…

जानिए ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का महत्त्व--

जानिए ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का महत्त्व--

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य आकाश में स्थित क्रान्ति वृत्त के राशि चक्र में एक दिन में लगभग एक अंश की गति से भ्रमण करता है | यह सदैव मार्गी होता है | यह सिंह राशि का स्वामी है जिसमें 1-20 अंश तक मूल त्रिकोण तथा 21-30 अंश तक स्व राशि में समझा जाता है | सूर्य मेष राशि के 1 अंश से 9 अंश तक उच्च तथा 10 अंश पर परम उच्च होता है | तुला राशि में 1-9 अंशों तक नीच तथा 10 अंश पर परम नीच का होता है | सूर्य अपने स्थान से सातवें स्थान को पूर्ण दृष्टि से देखता है | चन्द्र ,मंगल गुरु  सूर्य के मित्र ,बुध सम , शनि व शुक्र शत्रु हैं | सूर्य द्वारा एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश को संक्रांति कहा जाता है | वर्ष में बारह संक्रांतियां होती हैं | सूर्य संक्रांति से 16 घटी पहले तथा 16 घटी बाद में पुण्य काल  होता है जो दान ,जाप ,उपासना, होम इत्यादि धार्मिक कार्यों के लिए उत्तम कहा गया है |     सूर्य का निसर्ग बल नव ग्रहों  में सबसे अधिक है | उत्तरायण में ,अपने वार- होरा -नवांश में ,स्व -मित्र-मूल त्रिकोण  -उच्च राशि में , वर्गोत्तम नवांश में, दिन के मध्य में तथ…

क्या होगा भविष्यवाणियों के अनुसार 2012 में..???

क्या होगा भविष्यवाणियों के अनुसार 2012  में..???

आज मानव समाज को (मै) शब्द के दोष ने पूर्ण रूप से जकड़ा हुआ है जो की हमारे मन को बाहरी इन्द्रियों से जकड़े हुए हैं. वह अपने आप को इश्वर से भी शक्तिशाली मन रहे है और इश्वर के बनाये हुए नियम और कानून से खुलेआम खिलवाड़ कर रहा है .. जिसका पतन निश्चय है -
जिस तरह जन्‍म और मृत्‍यु जीवन का सत्‍य है , उसी प्रकार आशा और आशंका हमारे मन मस्तिष्‍क के सत्‍य हैं। जिस तरह गर्भ में एक नन्‍हीं सी जान के आते ही नौ महीने हमारे अंदर आशा का संचार होता रहता है , वैसे ही किसी बीमारी या अन्‍य किसी परिस्थिति में बुरी आशंका भी हमारा पीछा नहीं छोडती। मन मस्तिष्‍क में आशा के संचार के लिए हमारे सामने उतने बहाने नहीं होते , पर आशंका के लिए हम पुख्‍ता सबूत तक जुटा लेते हैं। कुछ दिनों से लगातार 2012 दिसम्‍बर के बारे में विभिन्‍न स्रोतो से भयावह प्रस्‍तुतियां की जा रही हैं। इससे भयभीत या फिर जिज्ञासु पाठक एक माह से मुझसे इस विषय पर लिखने को कह रहे हैं , पर दूसरे कार्यो में व्‍यस्‍तता की वजह से इतने दिन बाद आज मौका मिला है। 
विगत कुछ समय से यह बहस का विषय बन गया है कि क्या …