माँ बगलामुखी के प्राचीन सिद्ध पीठ/धाम(मंदिर),नलखेडा,जिला-शाजापुर(मध्यप्रदेश) और आचार्य पंडित केलाश शास्त्री--

माँ बगलामुखी के प्राचीन सिद्ध पीठ/धाम(मंदिर),नलखेडा,जिला-शाजापुर(मध्यप्रदेश) और आचार्य पंडित केलाश शास्त्री-----
तांत्रिकों की देवी बगलामुखी-----

---यदि आप किसी भी परेशानी,अड़चन या विवाद अथवा किसी भी अन्य कारण से परेशान हें तो इस गुप्त नवरात्री के सुअवसर पर अनुष्ठान करवाकर चिंता मुक्त हो जाएँ..
---विशेष पूजा अनुष्ठान --शत्रु बाधा निवारण हेतु तह चुनाव में विजय प्राप्ति हेतु( टिकिट मिलाने से लेकर,नामांकन और विजय तक का पूर्ण पूजा -अनुष्ठान) किये जाते हें..
---यह अनुष्ठान माँ बगलामुखी के प्राचीन सिद्ध पीठ/धाम(मंदिर) पर संपन्न किये जायेंगे..
---स्थान---नलखेडा,जिला-शाजापुर(मध्यप्रदेश)..इस स्थान पर महाभारत काल में पांडवों ने भी साधनाएँ की थी...

''ह्मीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलम बुद्धिं विनाशय ह्मीं ॐ स्वाहा।''

प्राचीन तंत्र ग्रंथों में दस महाविद्याओं का उल्लेख मिलता है। उनमें से एक है बगलामुखी। माँ भगवती बगलामुखी का महत्व समस्त देवियों में सबसे विशिष्ट है। विश्व में इनके सिर्फ तीन ही महत्वपूर्ण प्राचीन मंदिर हैं, जिन्हें सिद्धपीठ कहा जाता है। उनमें से एक है नलखेड़ा में। तो आइए धर्मयात्रा में इस बार हम अपको ले चलते हैं माँ बगलामुखी के मंदिर।

भारत में माँ बगलामुखी के तीन ही प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर माने गए हैं जो क्रमश: दतिया (मध्यप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल) तथा नलखेड़ा जिला शाजापुर (मध्यप्रदेश) में हैं। तीनों का अपना अलग-अलग महत्व है।
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मध्यप्रदेश में तीन मुखों वाली त्रिशक्ति माता बगलामुखी का यह मंदिर शाजापुर तहसील नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे स्थित है। द्वापर युगीन यह मंदिर अत्यंत चमत्कारिक है। यहाँ देशभर से शैव और शाक्त मार्गी साधु-संत तांत्रिक अनुष्ठान के लिए आते रहते हैं।

इस मंदिर में माता बगलामुखी के अतिरिक्त माता लक्ष्मी, कृष्ण, हनुमान, भैरव तथा सरस्वती भी विराजमान हैं। इस मंदिर की स्थापना महाभारत में विजय पाने के लिए भगवान कृष्ण के निर्देश पर महाराजा युधि‍ष्ठिर ने की थी। मान्यता यह भी है कि यहाँ की बगलामुखी प्रतिमा स्वयंभू है।
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यहाँ के पंडितजी आचार्य पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री, (मोब.--09669290067 --M.P.  एवं 09024390067--RAJ.) ने बताया कि यह बहुत ही प्राचीन मंदिर है। यहाँ के पुजारी अपनी दसवीं पीढ़ी से पूजा-पाठ करते आए हैं। 1815 में इस मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया था। इस मंदिर में लोग अपनी मनोकामना पूरी करने या किसी भी क्षेत्र में विजय प्राप्त करने के लिए यज्ञ, हवन या पूजन-पाठ कराते हैं।

यहाँ के अन्य पंडित गोपालजी पंडा, मनोहरलाल पंडा आदि ने बताया कि यह मंदिर श्मशान क्षेत्र में स्थित है। 


बगलामुखी माता मूलत: तंत्र की देवी हैं, इसलिए यहाँ पर तांत्रिक अनुष्ठानों का महत्व अधिक है। यह मंदिर इसलिए महत्व रखता है, क्योंकि यहाँ की मूर्ति स्वयंभू और जाग्रत है तथा इस मंदिर की स्थापना स्वयं महाराज युधिष्ठिर ने की थी।
नलखेडा स्थित इस मंदिर में मां श्री बगलामुखी जी का सिद्ध शक्तिपीठ है, जो लाखों लोगों की आस्था का केन्द्र है। वर्ष भर यहां श्रद्धालु मन्नत मांगने व मनोरथ पूर्ण होने पर आते-जाते रहते हैं....

मां बगलामुखी के इस मंदिर का उल्लेख पांडुलिपियों में भी मिलता है। पांडुलिपियों में मां के जिस स्वरूप का वर्णन है। मां उसी स्वरूप में यहां विराजमान है। ये पीतवर्ण के वस्त्र, पीत आभूषण तथा पीले पुष्पों की ही माला धारण करती हैं। इनके एक हाथ में शत्रु की जिहवा और दूसरे हाथ में मुदगर हैं। मंदिर में हर वर्ष मां बगलामुखी की जयंती पर यहां मां का अनुष्ठान व विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है।

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इस मंदिर में बिल्वपत्र, चंपा, सफेद आँकड़ा, आँवला, नीम एवं पीपल के वृक्ष एक साथ स्थित हैं। इसके आसपास सुंदर और हरा-भरा बगीचा देखते ही बनता है। नवरात्रि में यहाँ पर भक्तों का हुजूम लगा रहता है।


कैसे पहुँचें:----

वायु मार्ग:---- नलखेड़ा के बगलामुखी मंदिर स्थल के सबसे निकटतम एयरपोर्ट इन्दोर   है।

रेल मार्ग:---- ट्रेन द्वारा इंदौर से 30 किमी पर स्थित देवास या लगभग 60 किमी मक्सी पहुँचकर भी शाजापुर जिले के गाँव नलखेड़ा पहुँच सकते हैं।

सड़क मार्ग:-----
01.------ कोटा(राजस्थान) से भी बस,टेक्सी/कार द्वारा द्वारा नलखेडा जाया जा सकता हें..कोटा से झालावाड,झालरापाटन,सोयत तथा सुसनेर होते हुए आमला चोराहे से पूर्व दिशा में स्थित नलखेडा नगर में यह भव्य मंदिर स्थित हें..
दुरी लगभग -180 किलोमीटर ...
02.--- इंदौर से लगभग 165 किमी की दूरी पर स्थित नलखेड़ा पहुँचने के लिए देवास या उज्जैन के रास्ते से जाने के लिए बस और टैक्सी उपलब्ध हैं।
इस वर्ष आषाढ़ी गुप्त नवरात्री (09 जुलाई 2013 ,मंगलवार ) से आशाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से पुनर्वसु नक्षत्र में शुरू हो रहे है अष्टमी भी मंगलवार चित्र नक्षत्र सक्रांति के दिन होने से इन नवरात्रों का महत्त्व और अधिक हो गया है

----संपर्क करें--

आचार्य पंडित "विशाल" दयानन्द शास्त्री, 
(मोब.--09669290067 --M.P.  एवं 09024390067--RAJ.)

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