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July 1, 2013 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

श्री कृष्ण जन्म अष्टमी 2013 --

श्री कृष्ण जन्म अष्टमी 2013 --- इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी 28 अगस्त,2013 (बुधवार ) को मनाई जाएगी... जब-जब भी असुरों के अत्याचार बढ़े हैं और धर्म का पतन हुआ है तब-तब भगवान ने पृथ्वी पर अवतार लेकर सत्य और धर्म की स्थापना की है। इसी कड़ी में भाद्रपद माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि को अत्याचारी कंस का विनाश करने के लिए मथुरा में भगवान कृष्ण ने अवतार लिया। चूँकि भगवान स्वयं इस दिन पृथ्वी पर अवतरित हुए थे अतः इस दिन को कृष्ण जन्माष्टमी अथवा जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इस दिन स्त्री-पुरुष रात्रि बारह बजे तक व्रत रखते हैं। इस दिन मंदिरों में झाँकियाँ सजाई जाती हैं और भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है। कृष्ण को लोग रास रसिया, लीलाधर, देवकी नंदन, गिरिधर जैसे हजारों नाम से जानते हैं. कृष्ण भगवान द्वारा बताई गई गीता को हिंदू धर्म के सबसे बड़े ग्रंथ और पथ प्रदर्शक के रूप में माना जाता है. कृष्ण जन्माष्टमी (Janmashtami) कृष्ण जी के ही जन्मदिवस के रूप में प्रसिद्ध है. शास्त्रों के अनुसार श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होने के बाद मनुष्य का भाग्य चमक जाता है। इंसान के जीवन की सभी समस्याएं नष…

क्या यह गलत नहीं हें..??? क्या तांत्रिक क्रियाऐं जीवन को नर्क बना देती हैं...???

क्या यह गलत नहीं हें..??? क्या तांत्रिक क्रियाऐं जीवन को नर्क बना देती हैं...???
विद्वेषण जैसी खतरनाक तांत्रिक क्रियाओं द्वारा पति-पत्नि में झगडे करवा दिए जाते हैं फिर वे ही एक दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं। ताडन जैसी भयानक तांत्रिक क्रियाओं द्वारा व्यक्ति को बीमार कर दिया जाता हैं। फिर बीमारी ही पकड में नहीं आती है अथवा इलाज करवा-करवा कर थक जाते हैं फिर भी लाभ नहीं होता हैं। स्तंभन जैसी तांत्रिक क्रियाओं एवं टूने-टोटकों द्वारा व्यापार-व्यवसाय ट्रक-बस खेती आदि को बांध दिया जाता है जिससे धन की आवक एवं ग्राहकी कम हो जाती हैं। कर्ज बढता ही जाता हैं एवं अंत में लाखों-करोडों का घाटा हो जाता हैं। मारण प्रयोग अर्थात् मूठ द्वारा व्यक्ति को मार दिया जाता है। ठंडी मूठ मार दी जाती है तो व्यक्ति बहुत समय तक बीमार रहता है फिर तडप-तडप कर मर जाता है। उच्चटान जैसी तांत्रिक क्रियाऐं एवं टूने-टोटके घरों में कर दिये जाते हैं तो फिर घरों में उच्चाटन होने लग जाता है अर्थात् घरों में छोटी-छोटी बातों पर लडाई-झगडे होने लग जाते हैं। फिर घर से सुख-शांति एवं बरकत दोनो ही चली जाती हैं। फिर धन व्यर्थ के कार्यों में ही…