जानिए की नए वस्त्र (ड्रेस/वस्त्र/पोशाक) कब और किस नक्षत्र में धारण कारण होगा लाभकारी

जानिए की नए वस्त्र (ड्रेस/वस्त्र/पोशाक) कब और किस नक्षत्र में धारण कारण होगा लाभकारी---

कब और किस नक्षत्र में धारण करें नए वस्त्र-----

नामकरण, मुंडन तथा विद्यारंभ जैसे संस्कारों के लिए तथा दुकान खोलने, सामान खरीदने-बेचने और ऋण तथा भूमि के लेन-देन और नये-पुराने मकान में प्रवेश के साथ यात्रा विचार और अन्य अनेक शुभ कार्यों के लिए शुभ नक्षत्रों के साथ-साथ कुछ तिथियों तथा वारों का संयोग उनकी शुभता सुनिश्चित करता है।

नक्षत्र ही भारतीय ज्योतिष का वह आधार है जो हमारे दैनिक जीवन के महत्वपूर्ण कार्यों को प्रभावित करता है। अतः हमें कोई भी कार्य करते हुए उससे संबंधित शुभ नक्षत्रों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए जिससे हम सभी कष्ट एवं विघ्न बाधाओं से दूर रहकर नयी ऊर्जा को सफल उद्देश्य के लिए लगा सकें। विभिन्न कार्यों के लिए शुभ नक्षत्रों को जानना आवश्यक है। प्रकृति के संतुलन के लिए भी तो आवश्यक है इसी की खोज करके ऋषियों ने नक्षत्र नमक यह उपाय बताए है, जिनका उपयोग निम्न कार्यों में किया जाता हैं--
1 - रत्न धारण करना 2- दान करना 3 - वस्तु प्रवाहित करना 4 - मंत्र जप - पूजा - अनुष्ठान 5 - रंगों - वस्त्रों का उपयोग -अनुपयोग 6 - वनस्पतियों को धारण करना 7 - विशिष्ट पदार्थो का हवन आदि मुख्य रूप से उपायों के रूप में बताए जाते है...

प्रत्येक हर नई वास्तु हमारे मन में उमंग भर देती है। सभी प्राणी चाहे वह आमिर हो या गरीब, सभी का नए कपड़ों के प्रति हमारा स्नेह भी कुछ इसी तरह का होता है। कई बार हमें जो वेशभूषा(ड्रेस) सबसे प्यारी होती है, अक्सर वही खराब हो जाती है। समझ में नहीं आता ‍ऐसा क्यों हुआ? हमारा ज्योतिष शास्त्र (एस्ट्रोलॉजी ) नक्षत्रों के द्वारा ऐसे मसलों को बड़ी रोचकता से सुलझाता है। 

क्या हैं नक्षत्र ..???? 

हमारे आकाश मंडल में 27 नक्षत्र है। यानी पूरे आकाश को 27 भागों में विभाजित कर हर भाग को एक नक्षत्र का नाम दिया गया है। ये नक्षत्र पॉजिटीव और नेगेटिव दोनों तरह के असर देते हैं।

यदि धारण की जाने वाली नई पोषक (वस्त्र/ड्रेस) को पंचांग या कैलेंडर में नक्षत्र देखकर पहली बार पहनी जाए तो हो सकता है अचानक आपकी आर्थिक सुधर जाए या फिर हो सकता है आपको लंबे समय से चली आ रही स्वास्थ्य समस्याओं से छुटकारा मिल जाए।

ऐसा भी हो सकता है कि नक्षत्रों की जानकारी के बिना पहनी ड्रेस को चूहे काट सकते हैं या फिर आपको आग से खतरा हो सकता है। तो क्यों न जानें नक्षत्र और नई ड्रेस के दिलचस्प संबंध को। जब भी चन्द्रमा किसी नक्षत्र में रहता है और उस समय आपने नई ड्रेस पहन ली तो रिजल्ट भी वैसे ही मिलेंगे।

भोजन,वस्त्र और आवास जैसी प्राथमिक आवश्यकताओं की पूर्ती किसी न किसी रूप में किसी न किसी प्रकार सभी करते ही हैं.प्राचीन -काल में विभिन्न पर्वों के अवसर पर नए -नए वस्त्र पहनने का प्राविधान रखा गया था.अब तो लोग अपनी क्षमता और जरूरत के अनुसार चाहे जब वस्त्र धारण कर लेते हैं.यहाँ हम आपको सूती -वस्त्र धारण करने का अनुकूल एवं प्रतिकूल अवसर के सम्बन्ध में बतलाना चाहते हैं.आजकल तो खादी में भी टेरीकोट का प्रचलन बढ़ गया है.परन्तु  टेरीन में काटन मिलाने पर ही टेरीकाट बनता है ,अतः उसके लिए भी यही नियम लागू होगा केवल ऊनी वस्त्र  इस दायरे में नहीं आयेंगें. कैलेण्डर,पंचांग आदि से आप कौन नक्षत्र कब तक और कबसे रहेगा इसकी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.किस नक्षत्र में नए सूती /टेरीकाट वस्त्र धारण करने पर क्या फल होता है ,इसे आइए जानते हैं कि किस नक्षत्र में चंद्र के रहने पर क्या असर हो सकता है----

अश्विनी---- अगर चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में रहता है ‍तब आप कोई नई ड्रेस पहनते हैं तो आप ढेर सारी नई ड्रेस
और पा सकते हैं।
भरणी- चंद्रमा के भरणी नक्षत्र में रहने पर पहनी नई ड्रेस घर में चोरी करवा सकती है। अत: भरणी नक्षत्र पर नई ड्रेस पहनने से बचें।
कृतिका- इस नक्षत्र में चंद्रमा हो तब नई ड्रेस कतई ना पहनें आपको आग से खतरा हो सकता है।
रोहिणी- इस नक्षत्र में चंद्रमा शुभ होता है। इस दिन पहनी नई ड्रेस से अचानक आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है।
मृगशिरा- इस नक्षत्र से जरा बचकर रहे। अगर भूल से आपने मृगशिरा में चंद्रमा रहने पर नई ड्रेस पहनी तो चूहे आपकी ड्रेस काट सकते हैं।
आर्द्रा- यह नक्षत्र, नए कपड़े पहनने पर मनी लॉस करवा सकता है। अत: इस नक्षत्र में चंद्रमा होने पर नई ड्रेस पहनने से बचें।
पुनर्वसु - प्रॉब्लम आ सकती है।
पुष्य- अति शुभ नक्षत्र है। इस पर चंद्रमा हो और साथ में आपकी नई ड्रेस तो चार चाँद लग सकते हैं। आपको अलग-अलग स्त्रोतों से आय प्राप्त हो सकती है।
आश्लेषा- बचकर रहे। ड्रेस खराब हो सकती है।
मघा- लाइफ में उलझनें बढ़ सकती हैं।
पूर्वा फाल्गुनी- प्रशासनिक समस्याएँ उभर सकती है।
उत्तरा फाल्गुनी- इनकम में बढ़ोतरी और पुरानी हेल्थ प्रॉब्लम से छुटकारा मिल सकता है।
हस्त - अगर आप करियर या स्टडी में सक्सेस चाहते हैं तो इस नक्षत्र में नई ड्रेस जरूर पहनें।
चित्रा- इस नक्षत्र में नई ड्रेस धारण करने से आपको एक नई ड्रेस और मिल सकती है।
स्वाति- यह नक्षत्र कोई बड़े अवसर या समारोह का सुख देता है। खाने-पीने के शौकीन लोग इस नक्षत्र पर नई ड्रेस पहन सकते हैं।
विशाखा- यह नक्षत्र नई ड्रेस के मामले में बड़ा शुभ है। इससे आपके फेम और नेम में इतना असर पड़ेगा कि आप छा जाएँगे।***प्रिय जन समागम***मिलना-जुलना कहीं भी संभव है.
अनुराधा- यह नक्षत्र मिलनसार लोगों के लिए है। इस दिन नई ड्रेस पहनने पर आपको अच्छे और नए फ्रैंड्स मिलेंगे।****प्रिय जन समागम****आप के घर आना
ज्येष्ठा- सावधान! हर प्रकार का नुकसान करवा सकता है।
मूल- नई ड्रेस खो सकती है। लॉन्ड्री से खराब हो सकती है।
पूर्वाषाढ़ा- इस नक्षत्र में चंद्रमा हो तब कतई नई ड्रेस न पहने आपको स्वास्थ्य की कोई नई समस्या शुरू हो सकती है।
उत्तराषाढ़ा- अगर इस नक्षत्र में चंद्रमा है और आपने नई ड्रेस पहनी तो आप अवश्य किसी बड़े सेमिनार या फंक्शन में भाग लेंगे जहाँ से आपको फ्यूचर की उजली राह नजर आएगी।
श्रवण- ह नक्षत्र आँखों को कष्ट दे सकता है।
धनिष्ठा- अगर आपका कोई काम बरसों से रूका पड़ा है तब इस नक्षत्र में चंद्रमा रहे उस दिन ड्रेस धारण कीजिए।
काम तुरंत बनेगा।
शतभिषा- इस नक्षत्र में नई ड्रेस हरगिज ना पहनें। आपको पॉइजन का खतरा हो सकता है।
पूर्वा भाद्रपद- इस नक्षत्र से भी सतर्क रहें। आपको पानी से खतरा हो सकता है।
उत्तरा भाद्रपद- तकलीफें बढ़ा सकता है।
रेवती- नई ड्रेस के मामले में अत्यंत शुभ और शानदार नक्षत्र है। आपको फाइनेंशियल प्रॉफिट हो सकता है साथ ही मनपसंद ज्वेलरी भी खरीद सकते हैं।

उपरोक्त नक्षत्रों में खरीदें गए कपड़े शुभ-अशुभ फल नहीं देते बल्कि  पहली बार धारण करने से इनके दर्शाए गए फल मिलते हैं। चाहे आप ने साइज देखने के वास्ते ही हों।अगर आप चाहते हैं कि नई ड्रेस के शुभ परिणाम मिले तो नक्षत्रों पर नजर जरुर डाले।

नोट---उपरोक्त विश्लेषण प्राचीन ऋषि-मुनियों ने वैज्ञानिक आधार पर अनुभव एवं परिक्षनोप्रांत निरूपित किये थे.
दैनिक जीवन में शुभता व सफलता प्राप्ति हेतु नक्षत्रों का उपयोगी एवं व्यावहारिक ज्ञान बहुत जरूरी है। वास्तव में सभी नक्षत्र सृजनात्मक, रक्षात्मक एवं विध्वंसात्मक शक्तियों का मूल स्रोत हैं। अतः नक्षत्र ही वह सद्शक्ति है जो विघ्नों, बाधाओं और दुष्प्रभावों को दूर करके हमारा मार्ग दर्शन करने में सक्षम है।

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