जानिए अपनी जन्म कुण्डली से की कब बनेगा आपके विवाह का 
योग....?????

पण्डित "विशाल" दयानन्द शास्त्री।।(सशुल्क ज्योतिष, वास्तु एवम् हस्तरेखा परामर्श सेवाएं उपलब्ध हैं) मोब..--09669290067....।।
वाट्सअप---09039390067.....।।

आजकल सभी समाज और वर्ग में कुंवारे या अविवाहित युवक युवतियों की संख्या में निरंतर वृद्धि हो रही हैं।।
कुंवारे या अविवाहित जातक ( युवक युवती ) के परिजन किसी योग्य और अनुभवी ज्योतिषाचार्य को उनकी जन्म कुंडली दिखाकर ज्ञात कर सकते हैं हैं उनके बच्चों का विववह कब होगा ???
यथा ---
पण्डित "विशाल" दयानन्द शास्त्री के अनुसार----- जब जन्म कुण्डली में अष्टमेश पंचम में हों व्यक्ति का विवाह विलम्ब से होने की संभावना बनती है. अष्टम भाव व इस भाव के स्वामी का संबन्ध जिन भावों से बनता है. उन भावों के फलों की प्राप्ति में बाधाएं आने की संभावना रहती है.
------इसके अलावा जब जन्म कुण्डली में सूर्य व चन्द्र शनि से पूर्ण दृष्टि संबन्ध रखते हों तब भी व्यक्ति का विवाह देर से होने के योग बनते है. इस योग में सूर्य व चन्द्र दोनों में से कोई सप्तम भाव का स्वामी हो या फिर सप्तम भाव में स्थित हों तभी इस प्रकार की संभावना बनती है.
-----जब कुंडली में शुक्र केन्द्र में स्थित हों और शनि शुक्र से सप्तम भाव में स्थित हों तो व्यक्ति का विवाह वयस्क आयु में प्रवेश के बाद ही होने की संभावना बनती है.
------ जब शनि सप्तमेश होकर एकादश भाव में स्थित हों और एकादशेश दशम भाव में हों तो व्यक्ति का विवाह 21 से 23 वर्ष में होने की उम्मीद रहती है.
------ यदि शुक्र चन्द्र से सप्तम भाव में स्थ्ति हो और शनि शुक्र से सप्तम भाव में स्थित हों तो भी व्यक्ति का विवाह शीघ्र हो सकता है.
------ पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार ध्यान रखें इसके अतिरिक्त सप्तमेश और शुभ ग्रह द्वितीय भाव में हों तो व्यक्ति का विवाह 21 वर्ष में हो सकती है.
------- जब जन्म कुण्डली में शुभ ग्रह प्रथम, द्वितीय या सप्तम भाव में हों तब व्यक्ति का विवाह 21 वर्ष के आसपास होने के योग बनते है.
------ पण्डित "विशाल" दयानन्द शास्त्री के अनुसार चन्द्र जब कुण्डली में शुक्र से सप्तम भाव में हो व बुध चन्द्र से सप्तम भाव में और अष्टमेश पंचम में हो तो व्यक्ति का विवाह 22 वें वर्ष में होने की संभावना बनती है.
------इसके अतिरिक्त जब किसी जातक की कुंडली में शुक्र द्वितीय में और मंगल अष्टमेश के साथ हों तो व्यक्ति बाईस से सताईस वर्ष की आयु में विवाह करता है.
-----ध्यान रखें जब चन्द्र शुक्र से सप्तम में और लग्नेश शुक्र एकादश भाव में स्थित हों तो व्यक्ति का विवाह 27 वें वर्ष में होने की संभावनाएं बनती है.
-----यदि किसी जातक की कुण्डली में सप्तमेश नवम में हो, शुक्र तीसरे में हो तो व्यक्ति का विवाह 27 से 30 के मध्य की आयु में होने के योग बनते है.
------- पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार जब कुंडली में अष्टमेश स्व-राशि में स्थित हों और लग्नेश शुक्र के साथ हो तो व्यक्ति का विवाह विलम्ब से होने की संभावना बढ़ जाती है.
------ जब किसी जन्म कुंडली में सप्तमेश त्रिकोण भावों में क्रूर ग्रहों के साथ हों और शुक्र भी पाप ग्रहों से पीड़ित होकर द्वितीय भाव में स्थित हों तो 30 वर्ष के बाद विवाह की संभावना रहती है.
----- पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार जब लग्नेश या सप्तमेश स्वराशि में स्थित होकर पंचम या छठे भाव से दूर स्थित हो तो व्यक्ति की शादी देर से हो सकती है।।।

कल्याण हो।।। शुभम भवतु।। चिरायु भाव।।।

पण्डित "विशाल"दयानन्द शास्त्री---
ज्योतिष, वास्तु एवम् हस्तरेखा तथा आध्यात्मिक सलाहकार।।
मोब.--09669290067......।।

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