सुश्री मायावती की कुंडली का विवेचन---

सुश्री मायावती की कुंडली का विवेचन---

देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश (यूपी) में विधानसभा चुनाव वर्ष 2017 की पहली तिमाही में होने हैं, किन्तु सभी बड़े दलों ने इसकी तैयारियों का बिगुल अभी से फूंक दिया है || 
उल्लेखमिय हैं की उत्तरप्रदेश की स्थापना कुंडली 1 अप्रैल 1937 को धनु लग्न और वृश्चिक राशि में हुई थी । इस कुंडली में वर्तमान में शनि की साढ़े- सती का तीव्र प्रभाव तथा राहु में गुरु की संवेदनशील दशा चलने से साम्प्रदायिक हिंसा का योग बन रहा है। बाद में जनवरी 2017 में शनि धनु राशि में पहुंच कर उत्तरप्रदेश की कुंडली के दशम भाव में गोचर कर रहे गुरु को दृष्टि दे कर सत्ता परिवर्तन का योग बन देंगे।

उत्तर प्रदेश में प्रमुख पार्टी बसपा की प्रमुख मायावती का जन्म 15 जनवरी सन् 1950 को रात्रि 7 बजकर 50 मि0 पर दौलतपुर(उत्तर प्रदेश) में हुआ था।

सुश्री मायावती कर्क लग्न एवं मकर राशि में जन्म लेने वाली जातक हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री के अनुसार जो घनिष्ठा नक्षत्र एवं सिद्धि योग में जन्म लेते हैं वे जीवन में शून्य से शिखर तक पहुंचते हैं।

इंसान की किस्मत में यदि सितारे उसके साथ हो तो वह बुलंदियों को हासिल कर ही लेता है। इसी एक मिसाल है यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती। सुश्री मायावती की कुंडली में कई प्रबल और दुर्लभ योग हैं। इनकी ही वजह से वह आने वाले लोक सभा चुनाव में गहरी छाप छोड़ेंगी। दस से ऊपर शानदार ग्रहीय योग और महा दशाओं के चलते आने वाले समय में राजनीति की धूरी इनके पास ही घूमेगी। 

उज्जैन (मध्यप्रदेश) के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री ने इनकी कुंडली का गहन अध्यन किया और उसके परिणाम निम्न रहे--

शुश्री मायावती की कुंडली में भाग्येश गुरु की सिंह राशि में स्थिति घोषित एवं अघोषित दोनों तरह की संपत्ति का स्वामी बनाता है। नीचस्थ केतु का एकादश भाव में स्थित होना इसे और भी बल देता है। पंचम स्थान में स्थित राहु, शनि एवं मंगल जातक को बेहद महत्वाकांक्षी बना देता है और लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में नैतिकता आड़े नहीं आती है।मायावती की कुंडली में मंगल कर्म स्थान का मालिक है। मंगल, शनि और राहु के साथ स्वग्रही होकर पंचम स्थान में स्थित है। सप्तम स्थान में मकर राशि का सूर्य और चंद्रमा गृहस्थ जीवन के सुखों से अलग कर देता है। 

लग्नेश चन्द्रमा सप्तम भागवत होकर लग्न पर दृष्टि निक्षेप कर रहा है। लग्नेश चन्द्रमा को 1.55 षड्बल प्राप्त है। लाभ भाव का स्वामी शुक्र भी चलित चक्र में चन्द्रमा से सप्तम भाव में संयुक्त है और लग्न पर दृष्टिपात कर रहा है। धनेश सूर्य के साथ, लग्नेश चन्द्रमा की युति तथा दद्दशेष बुद्ध के साथ सप्तम भाव में परस्पर युति से संबंध के कारण ही मायावती अविवाहित हैं।सप्तमेश शनि स्व नक्षत्र अनुराधा में स्थित है। शनि को 1.36 षड्बल प्राप्त है। अतः शनि कृत विवाह अवरोध सम्पुष्टि हो रही है।

पिछले विधानसभा निर्वाचन के समय सुश्री मायावती की कुंडली में शनि की महादशा में मंगल की अंतरदशा चल रही थी।

सुश्री मायावती की कुण्डली में इस समय बुध की महादशा में केतु का अन्तर चल रहा है। बुध पराक्रमेश व द्वादशेश होकर सप्तम भाव में सूर्य व चन्द्रमा के साथ स्थित है। केतु लाभ भाव में शुक्र की राशि में वृष में बैठा है किन्तु केतु की यह स्थिति नीच की है। कुण्डली का एकादश भाव मित्रों व प्रशंसको का प्रतिनिधित्व करता है। केतु की नीचता के कारण ही बसपा के प्रबल समर्थक व शुभ चिंतक स्वामी प्रसाद मौर्य व आरके चौधरी जैसे लोगों ने पार्टी को छोड़ दिया। 18 अक्टूबर तक बुध में केतु की दशा अभी दशा चलेगी। 

यह कार्यकाल सुश्री मायावती के लिए संकटों से घिरा रहेगा। अगर मायावती ने सीधे संवाद का अभाव रखा तो पार्टी में पिछले कई वर्षो से घुटन महसूस कर रहे कुछ और खास लोग पार्टी का बहिष्कार कर सकते है। अष्टम का शुक्र लाभकारी 20 अक्टूबर से बुध की महादशा में शुक्र का अन्तर प्रारम्भ हो जायेगा। यह समय मायावती व बसपा दोनों के लिए समय अनुकूल रहेगा। शुक्र चतुर्थेश व लाभेश होकर अष्टम भाव में अपने मित्र की राशि कुम्भ में बैठा है। 

सुश्री मायावती की कुंडली में विपरीत राजयोग है, उनके समर्थक और दुश्मन बराबर बराबर की संख्या में हैं। दलित उत्थान की जो परिपाटी मायावती ने रखी है उसके आगे काशीराम और आम्बेडकर के मूल विचार एक सजीव होकर प्रकट हुए हैं। लेकिन यह भी आश्चर्य है कि मायावती ने सिर्फ दलितों को ही नहीं सभी जातियों को भी राजनैतिक प्रश्रय देकर आने वाले समय के लिए अपनी गद्दी को मजबूत किया है।

चूँकि अष्टम का शुक्र लाभकारी होता है। इस भाव का शुक्र साझेदारी व गठबंधन से लाभ करवाता है। सम्भावना है कि दिसम्बर तक बसपा और कांग्रेस का गठबंधन हो जायेगा। दोनों पार्टियॉ मिलकर उत्तर प्रदेश के आगामी विधान सभा का चुनाव लड़ेंगी। इस गठबंधन से दोनों का फायदा होगा लेकिन सबसे अधिक लाभ बसपा को ही प्राप्त होगा। त्रिशंकु विधानसभा बनने की स्थिति में मायावती यूपी में मुख्यमंत्री बनने की सबसे प्रबल दावेदार होंगी।




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