जानिए मासिक धर्म के बारे में ?? मासिक धर्म के समय में क्या और क्यों रखें सावधानी

जानिए मासिक धर्म के बारे में ?? 
मासिक धर्म के समय में क्या और क्यों रखें सावधानी---


प्रिय पाठकों, ईश्वर  द्वारा स्त्री और पुरुषों में कई भिन्नताएं रखी गई हैं। इन भिन्नताओं के कारण स्त्री और पुरुषों में कई शारीरिक और स्वास्थ्य संबंधी अनेक विषमताएं रहती हैं। इन्हीं विषमताओं में से एक हैं स्त्रियों में मासिक-धर्म।  

मासिक धर्म या माहवारी ( mahvari ) स्त्रियों को हर महीने योनि से होने वाला लाल रंग के स्राव को कहते है। माहवारी ( Menses ) के विषय में लड़कियों को पूरी जानकारी नहीं होने पर उन्हें बहुत दुविधा का सामना करना पड़ता है। पहली बार माहवारी ( period ) होने पर जानकारी अभाव में लड़कियां बहुत डर जाती है। उन्हें बहुत शर्म महसूस होती है और अपराध बोध से ग्रस्त हो जाती है। हीनता की भावना पैदा हो जाती है।

इस प्रक्रिया से घबराने या कुछ गलत या गन्दा होने की हीन भावना महसूस करने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। माहवारी मासिक धर्म को एक सामान्य  शारीरिक गतिविधि  ही समझना चाहिए जैसे उबासी आती है या छींक आती है। भूख ,प्यास लगती है या सू-सू  पोटी आती है।

माहवारी को रजोधर्म भी कहते है। ये शारीरिक प्रक्रिया सभी क्रियाओं से अधिक महवपूर्ण पूर्ण है ,क्योकि इसी प्रक्रिया से ही मनुष्य का ये संसार चलता है। मानव की उत्पत्ति इसके बिना नहीं हो सकती। प्रकृति ने स्त्रियों को गर्भाशय ( Uterus ) , अंडाशय  (Ovary ) , फेलोपियन ट्यूब , और योनि (Vagina ) देकर उसे सन्तान उत्पन्न करने का महत्वपूर्ण काम दिया है।  अतः माहवारी या मासिक धर्म गर्व की बात होनी चाहिए ना कि शर्म की या हीनता की । सिर्फ इसे समझना और संभालना आना जरुरी है।

वैदिक धर्म के अनुसार मासिक धर्म के दिनों में महिलाओं के लिए सभी धार्मिक कार्य वर्जित किए गए हैं। साथ ही इस दौरान महिलाओं को अन्य लोगों से अलग रहने का नियम भी बनाया गया है। ऐसे में स्त्रियों को धार्मिक कार्यों से दूर रहना होता है क्योंकि सनातन धर्म के अनुसार इन दिनों स्त्रियों को अपवित्र माना गया है। प्रचलित धारणा अनुसार इंद्र का बचा हुआ पाप लेने के कारण, पश्चाताप स्वरूप हर महीन स्त्रीयों को मासिक धर्म होता है और वरदान के रूप में इंद्र ने कहा की "महिलायें, पुरुषों से कई गुना ज्यादा काम का आनंद उठाएंगी" | 

हिन्दू धर्म की प्रचलित धारणा अनुसार  मासिक धर्म के दौरान महिलायें ब्रह्म-हत्या का पाप ढो रही होती हैं, अपने गुरु की हत्या का पाप और गुरु के बीना भगवान नहीं मिलते इसलिए महिलाओं को मन्दिर नहीं जना चाहिये |

हिन्दू धर्म में इस दौरान महिलाओं को अन्य लोगों से अलग रहने का नियम है क्यूंकी ऐसे में स्त्रियों को अपवित्र माना गया है। उस दौरान वे महिलाएं कहीं बाहर आना-जाना नहीं करती थीं। इस अवस्था में उन्हें एक वस्त्र पहनना होता था, ज़मीन पर सोना होता था और वे अपना खाना आदि कार्य स्वयं ही करती थीं। 
इस दौरान महिलाएं घर के किसी भाग में सबसे अलग रहती हैं और जमीन पर चटाई बिछाकर सोती हैं। इस कारण मासिक धर्म महिलाओं के लिए दंड का समय बन जाता है। प्राचीन काल में तो इन्हें अलग कमरे में रहना पड़ता था जहां न सूर्य की रोशनी पहुंचती थी और न खुली हवा होती थी। मासिक धर्म के विषय में यह मान्यता है कि इस दौरान स्त्री अचार को छू ले तो अचार सड़ जाता है। पौधों में पानी दे तो पौधे सूख जाते हैं।

यह व्यवस्था प्राचीन काल से ही चली आ रही है। पुराने समय में ऐसे दिनों में महिलाओं को कोप भवन में रहना होता था। उस दौरान वे महिलाएं कहीं बाहर आना-जाना नहीं करती थीं। इस अवस्था में उन्हें एक वस्त्र पहनना होता था और वे अपना खाना आदि कार्य स्वयं ही करती थीं।
मासिक धर्म के दिनों के लिए ऐसी व्यवस्था करने के पीछे स्वास्थ्य संबंधी कारण हैं। आज का विज्ञान भी इस बात को मानता है कि उन दिनों में स्त्रियों के शरीर से रक्त के साथ शरीर की गंदगी निकलती है जिससे महिलाओं के आसपास का वातावरण अन्य लोगों के स्वास्थ्य की दृष्टि से हानिकारक हो जाता है, संक्रमण फैलने का डर रहता है। साथ ही उनके शरीर से विशेष प्रकार की तरंगे निकलती हैं, वह भी अन्य लोगों के लिए हानिकारक होती है। बस अन्य लोगों को इन्हीं बुरे प्रभावों से बचाने के लिए महिलाओं को अलग रखने की प्रथा शुरू की गई।

माहवारी के दिनों में महिलाओं में अत्यधिक कमजोरी भी आ जाती है तो इन दिनों अन्य कार्यों से उन्हें दूर रखने के पीछे यही कारण है कि उन्हें पर्याप्त आराम मिल सके। इन दिनों महिलाओं को बाहर घुमना भी नहीं चाहिए क्योंकि ऐसी अवस्था में उन्हें बुरी नजर और अन्य बुरे प्रभाव जल्द ही प्रभावित कर लेते हैं। वैज्ञानिक मत के अनुसार इस समय महिलाओं को इनफेक्शन का अधिक खतरा रहता है। यही कारण है कि अन्य लोगों को इसके बुरे प्रभाव एवं महिलाओं को संक्रमण से बचाने के लिए उन्हें घर के कामकाज से अलग रखकर आराम करने की बात कही गयी होगी। और समय के साथ इस बात का रूप ही बदल गया होगा।

माहवारी और छूआछूत का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं एक भी कारण ऐसा नहीं है की मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के साथ अछूतों जैसा व्यवहार हो. बस परंपरा के नाम पर अब भी यह चला आ रहा है. अरे महिलाओं का मासिक धर्म या माहवारी एक सहज वैज्ञानिक और शारीरिक क्रिया है. लेकिन महिलाओं पर लगाई जाने वाली सामाजिक पाबंदियों से ये दिन किसी सजा से कम नहीं है. खासकर किसी त्योहार के समय ऐसा होने पर काफी दिक्कत और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है | संभवतया जब भी महिलाओं को पीरियड्स टाईम आता तो उस वक्त उनमें काफी कमजोरी आ जाती है इसलिए ही महिलाओं को इन दिनो अन्य कार्यो से दूर रखा जाता है. बाहर घूमने-फिरने इसलिए नहीं दिया जाता है क्योकि इस समय में इन्हे बुरी नजर व बुरे प्रभाव जल्द ही लग जाते है | महिलाओं में इस समय अशुद्धीयाँ निकलती हैं जो आसपास के वातावरण के साथ-साथ उनके आसपास रहने वाले लोगो के लिए हानिकारक होती है. इससे संक्रमण फैलने का ड़र बना रहता है. ऐसा न्ही कहा जाता है की उस समस उनके शरीर से कुछ विशेष प्रकार की तंरगे नकारात्मक (नेगाटिव एनर्जी) निकलती है जो की वातावरण को दूषित भी कर सकती है|

पीरियड्स महीने के सब से कठिन दिन होते हैं. इस दौरान शरीर से विषाक्त पदार्थ निकलने की वजह से शरीर में कुछ विटामिनों व मिनरल्स की कमी हो जाती है, जिस की वजह से महिलाओं में कमजोरी, चक्कर आना, पेट व कमर में दर्द, हाथपैरों में झनझनाहट, स्तनों में सूजन, ऐसिडिटी, चेहरे पर मुंहासे व थकान महसूस होने लगती है. कुछ महिलाओं में तनाव, चिड़चिड़ापन व गुस्सा भी आने लगता है. वे बहुत जल्दी भावुक हो जाती हैं. इसे प्रीमैंस्ट्रुअल टैंशन (पीएमटी) कहा जाता है.

टीनएजर्स के लिए पीरियड्स काफी पेनफुल होते हैं. वे दर्द से बचने के लिए कई तरह की दवाओं का सेवन करने लगती हैं, जो नुकसानदायक भी होती हैं. लेकिन खानपान पर ध्यान दे कर यानी डाइट को पीरियड्स फ्रैंडली बना कर उन दिनों को भी आसान बनाया जा सकता है.
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आपकी जानकारी हेतु पेश हैं मासिक धर्म (माहवारी) के सन्दर्भ में पूछे जाने वाले आम सवाल - 

क्या माहवारी के दौरान सेक्स करने से आप गर्भवती हो सकती हैं? 
क्या बिना माहवारी हुए आपका अण्डोत्सर्ग हो सकता है? 
क्या आप जान सकते हैं कि आपका अण्डोत्सर्ग कब होगा? ये सब और बहुत कुछ...

----मैं गर्भवति होने से कैसे बच सकती हूँ?
गर्भनिरोधक(कॉंन्ट्रासेप्टिव) इस्तेमाल करें! गर्भनिरोधन भाग देखें। यदि आपका मासिक धर्म न शुरु हुआ हो तो वे कण्डोम का इस्तेमाल कर सकती हैं। क्योंकि यदि मासिक धर्म न शुरु हुआ हो तो हार्मोन युक्त गर्भनिरोधक जैसे गर्भनिरोधक गोलियाँ शायद असर न करें।
----मेरा मासिक धर्म अभी शुरु नहीं हुआ है, तब भी क्या मैं गर्भवती हो सकती हूँ?
जी हाँ। चूँकी लड़कियों में डिम्ब का उत्सर्जन मासिक धर्म से 12 से 16 दिन पहले हो जाता है, इसलिए संभावना हो सकती है की लड़की पहली बार डिम्ब के उत्सर्जन के बाद ही गर्भवती हो जाएँ, मासिक धर्म शुरु होने के पहले ही।
----क्या मासिक धर्म न होने पर भी डिम्ब का उत्सर्जन हो सकता है?
मासिक धर्म न होने पर भी डिम्ब का उत्सर्जन हो सकता है, यदि
आपका वज़न कम हो|
आप बच्चे को अपना दूध पिलाती हों|
आप रजोनिवृत्ति (मेनुपॉज़) के करीब हों|
-----क्या मासिक धर्म के समय भी मैं गर्भवती हो सकती हूँ?
जी हाँ। चूंकी शुक्राणु योनि में 5 दिनों तक ज़िन्दा रह सकते हैं इसलिए यदि कोई लड़की मासिक धर्म के दौरान असुरक्षित सेक्स करती हैं और उनमें मासिक धर्म के तुरन्त बाद डिम्ब का उत्सर्जन (ओव्यूलेशन) होता है तो शुक्राणु डिम्ब को निषेचित कर सकता है और लड़की या महिला गर्भवती हो सकती हैं।

----मासिक धर्म के दौरान सेक्स से कोई नुकसान तो नहीं होता-
इस दौरान सहवास करने से स्त्री और पुरुष दोनों को कोई नुकसान नहीं होता। लेकिन जो महिलाएं मलशुद्धि के लिए पानी की बजाय टिशू पेपर का इस्तेमाल करती हैं, उनके साथ मासिक धर्म के दौरान सहवास करने से इन्फेक्शन हो सकता है क्योंकि मासिक के दौरान होने वाला स्राव गुदा द्वार के करीब होने की वजह से वहां बैक्टीरिया के बढ़ने की आशंका पैदा हो सकती है। इससे बचने के लिए ऐसी महिलाओं के साथ सहवास करते समय पुरुष कॉन्डम का इस्तेमाल करें तो बेहतर है।
अगर आपके पार्टनर को मासिक धर्म के दौरान पेट या योनि में दर्द नहीं हो रहा हो और यदि आपके पार्टनर को कोई आपत्ति न हो तो मासिक धर्म के दौरान कंडोम के बिना भी ‍इंटरकोर्स किया जा सकता है। इससे किसी तरह की बीमारी नहीं होती न ही कोई शारीरिक विकार उत्पन्न होता है।
मासिक धर्म के दौरान यदि महिला को किसी तरह के इन्फेक्शन की आशंका है तो ऐसे में सेक्स कदापि नहीं करना चाहिए।
मासिक धर्म के समय सेक्स करने के लिए यौनांगों की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें। सेक्स के बाद शिश्न तथा योनि को ठीक तरह से पानी से धोना चाहिए। माइल्ड डिसइंफेक्टेड मेडिसिन मिलाकर भी सप्ताह में दो बार यौनांगों की सफाई करनी चाहिए।

------मैं यह कैसे पता लगा सकती हूँ की डिम्ब का उत्सर्जन कब होगा?
इसके लिए थोड़ा गणित करना पड़ेगा! आपको अपने मासिक धर्म के शुरु होने के दिन से पीछे की ओर गिनना होगा। 4 दिनों तक डिम्ब के उत्सर्जन की ज़्यादा संभावना होती है जो आपके मासिक धर्म के पहलें दिन से 16 से 12 दिन पहले होता है।

यदि आपको हर 28 दिन पर मासिक धर्म होता है, 28 में से 16 घटाएं -

28-16 = 12  

अर्थात वे 4 दिन जब आप में डिम्ब का उत्सर्जन हो सकता है, आपके अगले मासिक धर्म शुरु होने के 12 दिन बाद हो सकते हैं। तो आपके मासिक धर्म शुरू होने के 12वें से 16वें दिन के बीच डिम्ब का उत्सर्जन हो सकता है।

यदि आपका मासिक धर्म 21 दिन का होता है तो 21 में से 16 घटाएं-

21-16 = 5

इसका अर्थ है की वे 4 दिन जब आप में डिम्ब का उत्सर्जन हो सकता है, आपके अगले मासिक धर्म शुरु होने के 5 दिन बाद हो सकते हैं। तो आपके मासिक धर्म शुरु होने के 5वें से 9वें दिन के बीच डिम्ब का उत्सर्जन हो सकता है।उलझ गयीं। ऑनलाइन ओव्युलेशन कैल्क्युलेटर की मदद लेकर करने की कोशिश करें।
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क्या मासिक धर्म के दौरान जाप किया जा सकता है?

इस प्रशन का एक ऐसा जवाब है जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगा - जिस प्रकार आप कभी भी अपने प्रेम, क्रोध और घृणा को प्रकट कर सकते हैं, जिस प्रकार आप कभी भी अपने मस्तिष्क में शुभ-अशुभ विचार ला सकते हैं, जिस प्रकार आप कभी भी अपनी जुबान से कड़वे या मीठे बोल बोल सकते हैं, उसी प्रकार आप कभी भी, कहीं भी, किसी भी स्थिति में प्रभु का ध्यान, उनका चिंतन, उनका स्मरण, उनका सिमरन या मानसिक जप कर सकते हैं।हांलकी परंपराएं और कर्मकांड, प्रतिमा के स्पर्श, मंदिर जाने या धार्मिक आयोजनों में शामिल होने की सलाह नहीं देती हैं। यदि हम काम, क्रोध, लोभ, मोह, घृणा, द्वेष इत्यादि को मासिक धर्म के दौरान अंगीकार कर सकते हैं, तो भला शुभ चिंतन में क्या आपत्ति है।मुसलमानों में भी ऐसा ही है. इस्लाम में माहवारी के दौरान लड़की को नापाक यानी अपवित्र माना जाता है. उसे इबादत की अनुमति नहीं होता. वह कुरान भी नहीं छू सकती. पहली बार माहवारी होने पर लड़की को घऱ से बाहर नहीं भेजा जाता. उसे इस बारे में जानकारी दी जाती है कि क्या करना और क्या नहीं. सातवें दिन स्नान के बाद वह पवित्र होती है.
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पीरियड्स (मासिक धर्म ) में इनसे करें परहेज---

- व्हाइट ब्रैड, पास्ता और चीनी खाने से बचें.

- बेक्ड चीजें जैसे- बिस्कुट, केक, फ्रैंच फ्राई खाने से बचें.

- पीरियड्स में कभी खाली पेट न रहें, क्योंकि खाली पेट रहने से और भी ज्यादा चिड़चिड़ाहट होती है.

- कई महिलाओं का मानना है कि सौफ्ट ड्रिंक्स पीने से पेट दर्द कम होता है. यह बिलकुल गलत है.

- ज्यादा नमक व चीनी का सेवन न करें. ये पीरियड्स से पहले और पीरियड्स के बाद दर्द को बढ़ाते हैं.

- कैफीन का सेवन भी न करें.

अगर पीरियड्स आने में कठिनाई हो रही है तो इन चीजों का सेवन करें-

- ज्यादा से ज्यादा चौकलेट खाएं. इस से पीरियड्स में आसानी रहती है और मूड भी सही रहता है.

- पपीता खाएं. इस से भी पीरियड्स में आसानी रहती है.

- अगर पीरियड्स में देरी हो रही है तो गुड़ खाएं.

- थोड़ी देर हौट वाटर बैग से पेट के निचले हिस्से की सिंकाई करें. ऐसा करने से पीरियड्स के दिनों में आराम रहता है.

- यदि सुबह खाली पेट सौंफ का सेवन किया जाए तो इस से भी पीरियड्स सही समय पर और आसानी से होते हैं. सौंफ को रात भर पानी में भिगो कर सुबह खाली पेट खा लीजिए.

पीरियड्स में यह भी रहे ध्यान---

- 1 बार में ही ज्यादा खाने के बजाय थोड़ीथोड़ी मात्रा में 5-6 बार खाना खाएं. इस से आप को ऐनर्जी मिलेगी और आप फिट रहेंगी.

- ज्यादा से ज्यादा पानी पीएं. इस से शरीर में पानी की मात्रा बनी रहती है और शरीर डीहाइड्रेट नहीं होता. अकसर महिलाएं पीरियड्स के दिनों में बारबार बाथरूम जाने के डर से कम पानी पीती हैं, जो गलत है.

- 7-8 घंटे की भरपूर नींद लें.

- अपनी पसंद की चीजों में मन लगाएं और खुश रहें.

पीरियड्स में अन्य सावधानियां---

- पीरियड्स में खानपान के अलावा साफसफाई पर भी ध्यान देना बेहद जरूरी है ताकि किसी तरह का बैक्टीरियल इन्फैक्शन न हो. दिन में कम से कम 3 बार पैड जरूर चेंज करें.

- भारी सामान उठाने से बचें. इस दौरान ज्यादा भागदौड़ करने के बजाय आराम करें.

- पीरियड्स के दौरान लाइट कलर के कपड़े न पहनें, क्योंकि इस दौरान ऐसे कपड़े पहनने से दाग लगने का खतरा बना रहता है.

- पैड कैरी करें. कभीकभी स्ट्रैस और भागदौड़ की वजह से पीरियड्स समय से पहले भी हो जाते हैं. इसलिए हमेशा अपने साथ ऐक्स्ट्रा पैड जरूर कैरी करें.

- अगर दर्द ज्यादा हो तो उसे अनदेखा न करें. जल्द से जल्द डाक्टर से चैकअप कराएं.

 डाइट में फाइबर फूड शामिल करना बेहद जरूरी है, क्योंकि यह शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है. दलिया, खूबानी, साबूत अनाज, संतरा, खीरा, मकई, गाजर, बादाम, आलूबुखारा आदि खानपान में शामिल करें. ये शरीर में कार्बोहाइड्रेट, मिनिरल्स व विटामिनों की पूर्ति करते हैं.

कैल्सियम युक्त आहार लें. कैल्सियम नर्व सिस्टम को सही रखता है, साथ ही शरीर में रक्तसंचार को भी सुचारु रखता है. एक महिला के शरीर में प्रतिदिन 1,200 एमजी कैल्सियम की पूर्ति होनी चाहिए. महिलाओं को लगता है कि दूध पीने से शरीर में कैल्सियम की मात्रा पूरी हो जाती है. लेकिन सिर्फ दूध पीने से शरीर में कैल्सियम की मात्रा पूरी नहीं होती. एक दिन में 20 कप दूध पीने पर शरीर में 1,200 एमजी कैल्सियम की पूर्ति होती है, पर इतना दूध पीना संभव नहीं. इसलिए डाइट में पनीर, दूध, दही, ब्रोकली, बींस, बादाम, हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल करें. ये सभी हड्डियों को मजबूत बनाते हैं और शरीर को ऐनर्जी प्रदान करते हैं.

 आयरन का सेवन करें, क्योंकि पीरियड्स के दौरान महिलाओं के शरीर से औसतन 1-2 कप खून निकलता है. खून में आयरन की कमी होने की वजह से सिरदर्द, उलटियां, जी मिचलाना, चक्कर आना जैसी परेशानियां होने लगती हैं. अत: आयरन की पूर्ति के लिए पालक, कद्दू के बीज, बींस, रैड मीट आदि खाने में शामिल करें. ये खून में आयरन की मात्रा बढ़ाते हैं, जिस से ऐनीमिया होने का खतरा कम होता है.

खाने में प्रोटीन लें. प्रोटीन पीरियड्स के दौरान शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है. दाल, दूध, अंडा, बींस, बादाम, पनीर में भरपूर प्रोटीन होता है.

विटामिन लेना न भूलें. ऐसा भोजन करें, जिस में विटामिन सी की मात्रा हो. अत: इस के लिए नीबू, हरीमिर्च, स्प्राउट आदि का सेवन करें. पीएमएस को कम करने के लिए विटामिन ई का सेवन करें. विटामिन बी मूड को सही करता है. यह आलू, केला, दलिया में होता है. अधिकांश लोग आलू व केले को फैटी फूड समझ कर नहीं खाते पर ये इस के अच्छे स्रोत हैं, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है. विटामिन सी और जिंक महिलाओं के रीप्रोडक्टिव सिस्टम को अच्छा बनाते हैं. कद्दू के बीजों में जिंक पर्याप्त मात्रा में होता है.

प्रतिदिन 1 छोटा टुकड़ा डार्क चौकलेट जरूर खाएं. चौकलेट शरीर में सिरोटोनिन हारमोन को बढ़ाती है, जिस से मूड सही रहता है.

अपने खाने में मैग्निशियम जरूर शामिल करें. यह आप के खाने में हर दिन 360 एमजी होना चाहिए और पीरियड्स शुरू होने से 3 दिन पहले से लेना शुरू कर दें.

पीरियड्स के दौरान गर्भाशय सिकुड़ जाता है, जिस की वजह से ऐंठन, दर्द होने के साथसाथ चक्कर भी आने लगते हैं. अत: इस दौरान मछली का सेवन करें.

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